🌿 नाड़ी वैद्य सत्यप्रकाश आर्य – 39 वर्षों का अनुभव
बवासीर (Piles) एक ऐसी समस्या है जिसकी तकलीफ़ सिर्फ वही समझ सकता है जो इससे गुजर चुका हो। इस बीमारी में व्यक्ति न तो ठीक से बैठ सकता है, न चल सकता है, और नींद भी पूरी नहीं हो पाती। यहाँ तक कि समाज में भी रोगी अपने को अछूत की तरह महसूस करने लगता है। लेकिन आयुर्वेद में इसका इलाज सिर्फ दवाइयों से नहीं, बल्कि जीवनशैली में बदलाव और कुछ असरदार घरेलू नुस्खों से भी संभव है।
आइए जानते हैं क्यों बनती है बवासीर, इसके कारण क्या हैं, और इसे कैसे प्राकृतिक तरीके से दूर किया जा सकता है – नाड़ी वैद्य सत्यप्रकाश आर्य जी के विशेष अनुभव से।
बवासीर के बनने के प्रमुख कारण
✅ गलत भोजन की आदतें
- भोजन के बीच पानी न पीना
- ज्यादा मसालेदार और तैलीय खाना
- गरम खाने के साथ ठंडा पानी या ठंडे के साथ गरम खाना खाना
- बार-बार हैवी डाइट लेना
- अति स्निग्ध, शीत और उष्ण भोजन का अत्यधिक सेवन
✅ जीवनशैली संबंधी कारण
- देर रात तक जागना और समय पर भोजन न करना
- ज्यादा देर तक बैठना, खासकर गद्देदार कुर्सी या सीट पर
- शारीरिक परिश्रम की कमी
✅ मानसिक कारण
अधिक तनाव और चिंता
इन कारणों से पेट में कब्ज बनती है, मल सख्त हो जाता है और धीरे-धीरे बवासीर की समस्या शुरू हो जाती है। आयुर्वेद कहता है – “पथ्य से विन किम विसजन, अपथ्य से विन किम औषधि”। यानी परहेज़ से रोग अपने आप चला जाता है, लेकिन अपथ्य (गलत खानपान) करते रहेंगे तो औषधि भी काम नहीं करेगी।
घरेलू आयुर्वेदिक उपाय
1️⃣ बादी बवासीर (Dry Piles) का इलाज
👉 मोरपंखी का पत्ता –
सुबह-सुबह मोरपंखी (जिसे सजावट के लिए भी लगाया जाता है) का एक पूरा पत्ता (लगभग हथेली जितना बड़ा) कुंडी में अच्छी तरह घोटकर पानी के साथ पी जाएँ। यह पित्त और वात को शांत करता है और बवासीर को जड़ से ठीक करता है।
👉 अश्वघन बूटी –
यदि मोरपंखी न मिले, तो अश्वघन बूटी (जिसे दूधी भी कहते हैं) का एक छत्त उखाड़कर सुबह-सुबह दही के साथ सेवन करें। इसके हरे, नीले और काले रंग के पत्ते तोड़ने पर दूध छोड़ते हैं। यह भी बहुत लाभकारी है।
2️⃣ खूनी बवासीर (Bleeding Piles) का इलाज
👉 चावल का प्रयोग –
एक मुट्ठी चावल को आधा घंटा पानी में भिगोकर फुला लें। फिर कुंडी में खूब घोटकर उसमें आधा ग्राम फिटकरी और स्वाद के अनुसार मिश्री मिला लें। इस मिश्रण को पी जाएँ। यह खूनी बवासीर को जल्दी आराम देता है।
👉 दरियाई नारियल + अकी पिष्टि + जहर मोहरा पिष्टि –
तीनों को बराबर मात्रा में लेकर सेवन करें। यह भी खूनी बवासीर में बहुत असरदार है।
- परहेज सबसे ज़रूरी है
- समय पर भोजन करें
- भोजन के बीच में घूंट-घूंट कर पानी पिएँ
- तैलीय, मसालेदार और भारी भोजन से परहेज़ करें
- ठंडा और गरम भोजन एक साथ न लें
- ज्यादा देर तक एक ही जगह बैठने से बचें
- तनाव कम करने के लिए प्राणायाम करें
- रात में सोते समय नाक में गाय का घी डालें – इससे बार-बार होने वाली बवासीर की संभावना भी कम होती है
बवासीर का दोबारा न हो, इसके लिए याद रखिए
👉 परहेज़ सबसे बड़ा इलाज है।
👉 शरीर को सक्रिय रखें – हल्का व्यायाम करें।
👉 कब्ज न बनने दें – फाइबर युक्त भोजन लें।
👉 खूब पानी पिएँ।
🌿 निष्कर्ष
बवासीर भले ही एक गंदी और दर्दनाक बीमारी हो, लेकिन अगर सही समय पर जीवनशैली में बदलाव करें और आयुर्वेदिक नुस्खों को अपनाएँ, तो बिना सर्जरी के भी इससे राहत पाई जा सकती है। याद रखिए, परहेज़ और समय पर सही इलाज से बवासीर की समस्या को हमेशा के लिए अलविदा कह सकते हैं।
अगर आप या आपके किसी अपने को भी बवासीर की समस्या है, तो नाड़ी वैद्य सत्यप्रकाश आर्य जी के 39 वर्षों के अनुभव का लाभ उठाएँ।
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