वर्णन : लोध्रासव एक शास्त्रीय हर्बल आयुर्वेदिक औषधि है। यह शास्त्रीय सूत्र के अनुसार निर्मित एक किण्वित तरल तैयारी है। इसमें 10 प्रतिशत से अधिक नहीं, और 5 प्रतिशत से कम अल्कोहल नहीं होता है जो समय की अवधि में तैयारी में स्वयं उत्पन्न होता है।
लोध्रासव का उपयोग मूत्र और गर्भाशय संबंधी विकारों के इलाज के लिए किया जाता है। यह सिद्ध स्त्री टॉनिक है और सभी प्रकार के स्त्री रोगों में उपयोगी है।
लोध्रसव में, लोध्र (सिम्प्लोकोस रेसमोस रॉक्सब.) मुख्य घटक है। लोध्र की तासीर कड़वी, कसैली, ठंडी होती है और प्राचीन काल से ही स्त्री रोग संबंधी विकारों के लिए इसका प्रयोग किया जाता रहा है।
घटक : लोध कपुर, पोहकरमूल, बड़ी इलायची, मूर्वा, वायविंडग, हर्रे, बहेड़ा, आंवला, अजवायन, चव्य, फूलप्रिंयगु, सुपारी, इन्द्रायाण की जड़, चिरायता, कुटकी, भारडगी, तगर, चित्रक, पीपलामूल, कूठ, अतीस, पाठा, इंद्रजौ, नागकेसर, नखी, तेजपात, काली मिर्च
उपयोग – यह आसव पेशाब की जलन, बार-2/अधिक मात्रा में बुंद-2 पेशाब होना, मूत्राशय का दर्द, पेशाब नली की सूजन, धातुस्त्राद कफ, खासी, चक्कर आना, संग्रहणी, अरुचि, प्रमेह, रजोविकार, काली मिर्च स्टुकोष्ठता, रक्तप्रदारादि व रक्तशोधक होता है।
चिकित्सक परामर्श अनुसार : मात्र 4 चम्मच दवा, 4 चम्मच पानी, सुबह-शाम भोजन के पहले या भोजन के तुरंत बाद लेना चाहिए या परामर्श अनुसार





























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