वर्णन : भृंगराजासव एक बहुहर्बल आयुर्वेदिक औषधि है जिसमें भृंगराज रस (एक्लिप्टा अल्बा), चतुरजात, हरीतकी, पिप्पली, जातिफला और गुड़ शामिल है।
चतुरजात चूर्ण दालचीनी (छाल सिनामोनम ज़ेलेनिकम), इला (एलेटेरिया इलायची के बीज), तेजपत्ता (सिनामोमम तमाला की पत्तियां) और नागकेसर (मेसुआ फेरिया के फूल) के मिश्रण से बनता है। परंपरागत रूप से चतुरजात को भूख में सुधार, पाचन को बढ़ावा देने, यकृत और गुर्दे संबंधी विकारों को ठीक करने के लिए निर्धारित किया जाता है। ये रुक्ष, तीक्ष्ण, लघु और उष्ण वीर्य हैं।
भृंगराजासव में उच्च पोषण मूल्य होता है। इस दवा में मौजूद विभिन्न जड़ी-बूटियाँ शरीर को विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट की समृद्ध सामग्री प्रदान करती हैं। इससे व्यक्ति की पोषण स्थिति में सुधार होता है और सामान्य दुर्बलता से छुटकारा पाने में मदद मिलती है।
घटक : भृंगराज, गुड़, हरड़, पीपल, जायफल, लौंग, दालचीनी, बड़ी इलायची, तेजपात, नागकेशर, धाय के फूल, जीकुट चूर्ण
उपयोग : इस आसव के उपयोग से सभी प्रकार के धातु-क्षय और राज-यक्षमा रोग नष्ट होते हैं। पांचो प्रकार की खांसी और कृशता को नष्ट करता है। यह बलकारक और कामोद्दीपक है। इसके सेवन से बन्ध्यत्व दूर हो स्त्री स्ंतानवती होती है। यह रक्त शुद्ध करता है।
उपयाेग मात्रा : 4 चम्मच दवा, 8 चम्मच पानी, सुबह शाम भोजन के तुरंत आधे घंटे बाद लेना चाहिए।
इसका प्रयोग चिकित्सक के परामर्श से करें















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